About Me

पेशे से पत्रकार हूं। जब भी आसपास कुछ घटते देखता हूं तो कुछ कहने का मन करता है। कुछ ऐसा जो टीवी नहीं कहता। अखबार नहीं लिखते। कई बातें हैं जो काम के दायरे में रहकर नहीं कह सकता। लिहाजा ब्लॉग पर आया हूं। शायद मन की बात रख सकूं।

Saturday, January 23, 2010

मुझे कहना है


जिंदगी में हर रोज ऐसा कुछ ना कुछ होता है कि आपको उस पर कुछ कहने को जी चाहता है। क्रिकेट में जीत गए तो आपका जी मचलने लगता है कुछ कहने को। दिनभर बिजली नहीं आई। आपके अंदर कुलबुलाहट मचने लगते हैं भंडास निकालने को। कोई चौक-चौराहे पर अपने मन का गुबार निकालता है, तो कोई अपने घर में। जिनके पास कलम है, जिनके पास किसी न्यूज़ चैनल का मंच है वो वहां मन का गुबार निकालते हैं। चूंकि उनकी पहुंच ज्यादा लोगों तक है इसलिए उनके कहे को सुनना पड़ता है। चाहे वो गलत ही क्यों ना बोलें। चाहे वो तर्क की जगह कुतर्क ही क्यों ना करें। उनकी बात सुनी जाती है। हालांकि, अक्सर उनकी बात सुनने के बाद लोग गरियाते ही हैं।
मेरे अंदर भी अक्सर ऐसी अकुलाहट होती है मीडिया में प्रकाशित, प्रसारित चीजों को लेकर। कई बार या कहें अक्सर मुझे लगता है कि मीडिया ने तर्क की जगह कुतर्क का सहारा लिया। मीडिया ने अपना एजेंडा चलाने की कोशिश की। खबर को बेचने के लिए मीडिया ने बिना वजह घटना को रंग देने की कोशिश की। लेकिन, कभी मैं कोई पत्रकार नहीं। किसी मीडिया संस्थान तक मेरी पहुंच नहीं। मैं कोई नेता नहीं। ना ही मेरा कोई मंच है। मैं एक पाठक हूं। एक समर्पित दर्शक हूं। लिहाजा मुझे लगा कि मुझे अपनी बात रखनी चाहिए। चूंकि शिकायती पत्र अक्सर अखबार वाले रद्दी की टोकरी में डाल देते हैं। टीवी में फीडबैक की गुंजाइश नहीं। ऐेसे में मैंने सोचा क्यों ना मैं भी ब्लॉगिंग शुरू कर दूं। जब अमिताभ बच्चन ब्लॉग के लिए समय निकाल सकते हैं तो मैं क्यों नहीं। तो आज मैंने भी बना डाला अपना ब्लॉग। नाम है रिपोर्टर, जो हर रिपोर्टर की रिपोर्ट करेगा।

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